Friday, August 7, 2009

यादें

भूलने की तमाम कोशिशें नाकाम हो गईं
उनको समझाने की आदत अब आम हो गईं
हमने तो अब उनके आगे सर झुका दिया
यादों ने ही उनसे सुलहनामा करा दिया

Thursday, August 6, 2009

कितना अच्छा लगता है , जब कोई मुझे देखता है और मुस्कुरा देता है, मैं समझता हूँ की मैं भी कोई सख्सियत हों मुझे भी कोई दे सकता है एक मुस्कराहट ,भले ही वो प्यार की हो या इर्ष्या
की , म्रदुल हो या कुटिल , ! मैं तो इसी से खुश हूँ किसी
ने पहली बार ही सही मुझे मुस्करा कर देखा/ मैं भी तब से अपने को कुछ खास समझने लगा हूँ , अह कितना अच्छा लगा यह पल ... काश तुम मुस्कराती रहो हमेशा यूँ ही मेरे लिए सिर्फ मेरे लिए.......